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Samastipur News: रोसड़ा में DCLR कंचन कुमारी झा गिरफ्तार, 2 लाख रुपये रिश्वत मामले में निगरानी की कार्रवाई

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | रोसड़ा की DCLR कंचन कुमारी झा को कथित तौर पर 2 लाख रुपये रिश्वत लेते निगरानी टीम ने गिरफ्तार किया। सरकारी आवास पर तलाशी और दस्तावेजों की जांच जारी।

समस्तीपुर, 27 अगस्त। समस्तीपुर जिले के रोसड़ा अनुमंडल में गुरुवार को निगरानी विभाग की कार्रवाई से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। भूमि सुधार उपसमाहर्ता (DCLR) कंचन कुमारी झा को कथित तौर पर दो लाख रुपये रिश्वत लेते पकड़े जाने की जानकारी सामने आई है। कार्रवाई जमीन विवाद से जुड़े एक मामले में शिकायत के आधार पर की गई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, निगरानी टीम ने ट्रैप कार्रवाई के बाद अधिकारी को हिरासत में लिया और उनके सरकारी आवास की तलाशी शुरू की।

जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर कंचन कुमारी झा को रोसड़ा की भूमि सुधार उपसमाहर्ता के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

जमीन विवाद के मामले से जुड़ा है आरोप

मामले की शुरुआत एक जमीन विवाद से जुड़ी शिकायत से होने की बात सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक विभूतिपुर निवासी एक व्यक्ति का मामला DCLR स्तर पर चल रहा था। आरोप है कि विवाद के निपटारे के एवज में दो लाख रुपये नकद के साथ वॉशिंग मशीन की कथित मांग की गई थी।

शिकायत मिलने के बाद निगरानी विभाग ने पहले शिकायत की सत्यता की जांच की। इसके बाद ट्रैप की योजना तैयार की गई। गुरुवार सुबह निगरानी टीम शिकायतकर्ता के साथ रोसड़ा स्थित DCLR के सरकारी आवास पहुंची। आरोप के मुताबिक रिश्वत की रकम स्वीकार किए जाने के दौरान टीम ने कार्रवाई की।

हालांकि, कथित वॉशिंग मशीन की मांग और पूरे रिश्वत प्रकरण से जुड़े अन्य आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और आधिकारिक दस्तावेज सामने आने के बाद ही मानी जाएगी।

सुबह सरकारी आवास पहुंची टीम

निगरानी विभाग की टीम गुरुवार सुबह करीब 8:30 से 9 बजे के बीच दो वाहनों से सरकारी आवास पहुंची थी। उस समय DCLR आवास में मौजूद थीं। टीम के अंदर जाने के बाद जांच शुरू हुई और बाहरी लोगों की आवाजाही को सीमित रखा गया। बाद में रोसड़ा थाना पुलिस के भी मौके पर पहुंचने की जानकारी सामने आई।

शुरुआती घंटों में कार्रवाई की वजह को लेकर आधिकारिक स्तर पर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई थी। बाद की रिपोर्टों में इसे रिश्वत से जुड़े ट्रैप मामले से जोड़ा गया।

आवास की तलाशी में 13 लाख रुपये मिलने की चर्चा

गिरफ्तारी के बाद निगरानी टीम ने सरकारी आवास में तलाशी अभियान चलाया। जमीन और राजस्व मामलों से जुड़े दस्तावेजों के साथ वित्तीय कागजातों की भी जांच किए जाने की जानकारी सामने आई है।

कुछ रिपोर्टों में तलाशी के दौरान करीब 13 लाख रुपये नकद मिलने का दावा किया गया है। हालांकि, इस कथित बरामदगी की आधिकारिक पुष्टि अभी स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं है। इसलिए इसे फिलहाल संभावित बरामदगी के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

निगरानी टीम कथित नकदी, दस्तावेजों और अन्य सामग्री के स्रोत की जांच कर सकती है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि तलाशी में वास्तव में क्या-क्या बरामद हुआ और उसका मामले से क्या संबंध है।

जमीन से जुड़े मामलों में DCLR की अहम भूमिका

DCLR यानी डिप्टी कलेक्टर लैंड रिफॉर्म्स का पद भूमि एवं राजस्व प्रशासन में महत्वपूर्ण होता है। भूमि विवाद, राजस्व मामलों और दाखिल-खारिज से संबंधित अपीलों में इस स्तर के अधिकारी की भूमिका रहती है।

जिला प्रशासन की वेबसाइट पर भी रोसड़ा की DCLR के रूप में कंचन कुमारी झा का नाम दर्ज है।

किसी व्यक्ति के दाखिल-खारिज संबंधी आवेदन पर अंचल स्तर से लिए गए फैसले के खिलाफ निर्धारित प्रक्रिया के तहत DCLR के समक्ष अपील की जा सकती है। जमीन के स्वामित्व, कब्जे और अन्य राजस्व विवादों से जुड़े मामलों में भी संबंधित कानूनी प्रक्रिया के तहत सुनवाई होती है।

इसी वजह से DCLR कार्यालय से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और निष्पक्षता प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।

जांच में दस्तावेजों की भी पड़ताल

तलाशी के दौरान जमीन विवाद और राजस्व मामलों से जुड़ी फाइलों की जांच किए जाने की जानकारी है। इसके अलावा बैंकिंग और निवेश से संबंधित कागजात भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।

निगरानी की कार्रवाई का उद्देश्य केवल कथित रिश्वत की रकम तक सीमित नहीं माना जा सकता। यदि जांच के दौरान कोई अतिरिक्त वित्तीय या दस्तावेजी साक्ष्य मिलता है तो उसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

फिलहाल इस संबंध में निगरानी विभाग की विस्तृत आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार है।

प्रशासनिक हलके में बढ़ी हलचल

DCLR स्तर के अधिकारी के खिलाफ ट्रैप कार्रवाई की खबर से रोसड़ा के प्रशासनिक और राजस्व महकमे में चर्चा तेज हो गई है। जमीन और राजस्व से जुड़े मामलों में भ्रष्टाचार के आरोप समय-समय पर सामने आते रहे हैं। ऐसे में निगरानी की कार्रवाई को गंभीर घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है।

इस मामले में आगे की तस्वीर जांच पूरी होने के बाद साफ होगी। कथित दो लाख रुपये की रिश्वत, वॉशिंग मशीन की मांग और 13 लाख रुपये की कथित बरामदगी—इन सभी बिंदुओं की आधिकारिक जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

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रिश्वत के आरोप से लेकर तलाशी तक, अब आगे क्या?

किसी सरकारी अधिकारी के खिलाफ रिश्वतखोरी का आरोप लगने के बाद ट्रैप कार्रवाई में जुटाए गए साक्ष्यों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। इस मामले में भी निगरानी टीम द्वारा शिकायत के सत्यापन और कथित रिश्वत की रकम के लेनदेन के बाद कार्रवाई किए जाने की बात सामने आई है।

अब जांच एजेंसी कथित रिश्वत की रकम, शिकायत से जुड़े दस्तावेज और तलाशी के दौरान मिले साक्ष्यों का मिलान करेगी। यदि अतिरिक्त नकदी या वित्तीय दस्तावेज आधिकारिक रूप से बरामद होते हैं, तो उनके स्रोत की भी जांच की जा सकती है।

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अभी सामने आई कई जानकारियां प्रारंभिक रिपोर्टों और सूत्रों पर आधारित हैं। इसलिए अंतिम निष्कर्ष निगरानी विभाग की आधिकारिक जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।

महत्वपूर्ण नोट

रिश्वत लेने, वॉशिंग मशीन मांगने और आवास से 13 लाख रुपये मिलने से संबंधित जानकारी में कुछ तथ्य अभी जांच या सूत्रों के स्तर पर हैं। अधिकारी के दोषी होने का अंतिम निर्धारण सक्षम न्यायालय की प्रक्रिया के बाद ही होगा।

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